“Had the vision been deferred until tomorrow, this tempest would not rage within my eyes today.”
अगर आज देखना या मिलना कल पर टाल दिया गया होता, तो आज आँखों में आँसुओं का यह तूफ़ान न होता।
इस शेर में शायर महबूब के दीदार के बाद दिल और आँखों में मची हलचल को बेहद नज़ाकत से बयां कर रहे हैं। हम अक्सर सोचते हैं कि जिसे चाहते हैं उसे एक नज़र देख लेने से दिल को सुकून मिल जाएगा, मगर यहाँ उस एक झलक ने आँखों में आँसुओं और बेक़रारी का तूफ़ान ला खड़ा किया है। शायर हसरत से कहता है कि काश यह मुलाकात कल पर टल जाती, तो आज दिल इस कदर बेचैन और आँखें इस कदर पुरनम न होतीं।
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