“O heart, boast not in vain of walking passion's way, when you cannot even keep a single sigh at bay.”
ऐ दिल, आशिक़ी का झूठा दम मत भरो, जब तुमसे अपनी आह को रोकना या ज़ब्त करना भी मुमकिन नहीं होता।
उर्दू शायरी की रवायत में सच्चे आशिक़ की पहचान उसका सब्र और ख़ामोशी होती है, जहाँ दर्द को होंठों तक न आने देना ही इश्क़ का सबसे बड़ा अदब है। इस शेर में शायर अपने ही दिल को समझाते हुए एक मीठा सा तंज़ करता है कि इश्क़ के बड़े-बड़े दावे करना छोड़ दो। जब तुम से दर्द में एक आह तक नहीं दबाई जाती और सारा राज़ खुल जाता है, तो फिर इस सख़्त रास्ते पर चलने का झूठा गुरूर कैसा!
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