“Along love's path, the more one lost all sight of destination, the more, O heart, was he fit to guide another on the way.”
इश्क़ के रास्ते में जो अपनी मंज़िल से जितना ज़्यादा भटका हुआ था, ऐ दिल, वह दूसरों का मार्गदर्शक बनने के उतना ही अधिक योग्य था।
इश्क़ के रास्ते का एक अनोखा फलसफ़ा यह शेर बयां करता है, जहाँ दुनिया के सारे नियम उल्टे हो जाते हैं। आम तौर पर रहबर उसे माना जाता है जिसे मंज़िल का सीधा रास्ता पता हो, मगर प्यार में वही सच्चा रहनुमा (ख़िज़्र-ए-राह) बन सकता है जो ख़ुद इस राह में भटक चुका हो और अपनी मंज़िल को पूरी तरह भुला बैठा हो। शायर कहते हैं कि इस रास्ते पर खो जाने का तजुर्बा और अपनी 'अना' को मिटा देना ही वह असल हिकमत है, जो किसी इंसान को दूसरों का दर्द समझने और उन्हें रास्ता दिखाने के क़ाबिल बनाती है।
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