दिल क़फ़स में लग चला था फिर परेशाँ कर दिया हम-सफ़ीरो! तुम ने क्यों ज़िक्र-ए-गुलिस्ताँ कर दिया

“My heart had almost settled in the cage, yet was disturbed anew; O fellow songbirds, why did you bring the garden into view?”

— ख़्वाजा अज़ीज़ुल हसन मजज़ूब
अर्थ

मेरा दिल पिंजरे में रमने ही लगा था कि फिर से बेचैन हो गया; ऐ साथी परिंदो, तुमने चमन का ज़िक्र क्यों छेड़ दिया?

विस्तार

इंसान जब किसी गहरे दुख या मजबूरी में होता है, तो धीरे-धीरे उसी दर्द को अपनी तक़दीर मानकर सब्र कर लेता है। शायर का दिल भी पिंजरे की क़ैद का आदी होने ही लगा था, लेकिन उसके साथी परिंदों ने अचानक आज़ाद चमन की बातें छेड़ दीं। उस ख़ूबसूरत बाग़ की याद ने भरते हुए ज़ख़्मों को फिर से कुरेद दिया—यह शेर बताता है कि कभी-कभी खोई हुई ख़ुशियों की याद मौजूदा ग़म से भी ज़्यादा तड़पाती है।

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