“Barely had my beloved appeared when they were hidden once more; alas, what cruel injustice you have wrought, O weeping eye!”
वह अभी साफ़ दिखाई देने ही लगे थे कि फिर से ओझल हो गए; अफ़सोस, ऐ रोती हुई आँख, तूने आँसू बहाकर यह कैसा घोर अंधेर कर दिया।
ज़रा सोचिए, जिसकी एक झलक पाने के लिए आँखें तरस रही थीं, वो सामने आया ही था कि आँखों में उमड़े आँसुओं ने सब धुंधला कर दिया। शायर यहाँ अपनी ही रोती हुई आँखों को उलाहना दे रहा है कि उसने महबूब के दीदार के इतने नाज़ुक पल पर आँसू बहाकर कैसा ग़ज़ब ढा दिया। यह इश्क़ की वह विडंबना है जहाँ मिलने की बेइंतहा ख़ुशी और छलकते जज़्बात ही दीदार की सबसे बड़ी रुकावट बन जाते हैं।
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