ले चल अब इज़्तिराब मुझे सू-ए-ला-मकाँ शायान-ए-वज्द आलम-ए-इमकाँ नहीं रहा

“Bear me away now, O restlessness, toward the placeless realm; this world of possibilities is worthy of ecstasy no more.”

— ख़्वाजा अज़ीज़ुल हसन मजज़ूब
अर्थ

हे मेरी बेचैनी, अब मुझे स्थान-रहित लोक (ला-मकाँ) की ओर ले चल, क्योंकि यह भौतिक संसार अब रूहानी मस्ती और वज्द के योग्य नहीं रहा।

विस्तार

इस शेर में शायर अपनी बेचैनी (इज़्तिराब) को कोई अज़ाब नहीं, बल्कि एक रहबर मानकर पुकारता है कि वह उसे इस भौतिक दुनिया की सीमाओं से परे ले जाए। उसे लगता है कि यह मुमकिन दुनिया (आलम-ए-इमकाँ) अब इतनी खोखली हो चुकी है कि यहाँ रूहानी मस्ती और बेख़ुदी (वज्द) के लिए कोई जगह नहीं बची। यह शेर सांसारिक सीमाओं से ऊबकर उस असीम, बे-ठिकाना दुनिया (ला-मकाँ) में खो जाने की एक गहरी सूफ़ी तड़प को बयां करता है।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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