वारफ़्तगी-ए-शौक़ का इमकाँ नहीं रहा आजा कि दिल में अब कोई अरमाँ नहीं रहा

“No possibility remains of passion’s wild delirium; Come now, for in my heart no desire lingers on.”

— ख़्वाजा अज़ीज़ुल हसन मजज़ूब
अर्थ

अब चाहत में बेख़ुदी और दीवानगी की कोई संभावना नहीं बची है; चले आओ क्योंकि अब दिल में कोई और अरमान बाक़ी नहीं रहा।

विस्तार

आम तौर पर महबूब को तब पुकारा जाता है जब सीने में चाहत और तड़प का तूफ़ान उठ रहा हो, लेकिन यहाँ एक अजीब सी ख़ामोशी और गहरा दर्द है। शायर कहता है कि अब आ भी जाओ, क्योंकि इश्क़ का वह दीवानापन और उम्मीदें अब दम तोड़ चुकी हैं। यह एक ऐसी थकी हुई मगर पुरसुकून पुकार है, जिसमें अब न तो कोई शिकायत बची है और न ही टूटने के लिए कोई नया अरमान।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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