એવી ન કાર્ય તણિ કાંઈ જ તીવ્રતા છે, કર્તાતણો અંહિં ન જે ઉપકાર ગાશે. ૬

“No task bears such intensity, you see,But that the doer's grace will praised be.”

— कलाપી
अर्थ

कोई भी कार्य इतना तीव्र या कठिन नहीं होता कि उसके कर्ता के उपकार का यहाँ गुणगान न किया जाए। हर प्रयास, चाहे कितना भी चुनौतीपूर्ण क्यों न हो, अंततः सराहा जाता है।

विस्तार

यह दोहा हमें खूबसूरती से याद दिलाता है कि कोई भी काम, चाहे कितना भी ज़रूरी या कठिन क्यों न हो, हमें उसे करने वाले के प्रति कृतज्ञ होना नहीं भूलना चाहिए। यह कर्ता की दया और प्रयास को स्वीकार करने और उसकी सराहना करने के महत्व पर ज़ोर देता है। यहाँ तक कि जब काम बहुत गहन हों, हमें हमेशा उन लोगों को धन्यवाद देना याद रखना चाहिए जो मदद करते हैं, उनके योगदान को पहचानते हुए। यह हमें हर कार्य के पीछे के मानवीय पहलू के प्रति सचेत रहने और दूसरों की सद्भावना का सम्मान करने की एक कोमल याद दिलाता है।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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