તું છે બધુઃ હું કાંઈ એ છું ના, મગર. યારી કરૂં ત્હારી? કરું યા ના? સનમ!

“You are everything, I am naught at all, but tell me, dearest, Shall I love you? Shall I or not, my beloved?”

— कलाપી
अर्थ

तुम सब कुछ हो, मैं कुछ भी नहीं हूँ। मगर, क्या मैं तुमसे प्रेम करूँ? करूँ या न करूँ, हे मेरे सनम?

विस्तार

यह दोहा उस व्यक्ति के दिल की बात कहता है जो अपने प्रिय के सामने खुद को बहुत छोटा महसूस करता है। शायर कहता है, "तुम सब कुछ हो, और मैं कुछ भी नहीं हूँ।" यह खुद को नीचा दिखाना नहीं, बल्कि प्रिय के प्रति गहरी प्रशंसा है जो उसे तुच्छ महसूस कराती है। इस बड़े अंतर के बावजूद, एक कोमल सवाल उठता है: "मेरे प्रिय, क्या मैं तुम्हारी दोस्ती की हिम्मत करूँ, या यह उचित नहीं होगा?" यह उस सुंदर दुविधा को दर्शाता है जब आप किसी ऐसे व्यक्ति से प्यार करते हैं जिसे आप इतना सम्मान देते हैं, और सोचते हैं कि क्या आपका स्नेह उनके स्वीकार करने योग्य है। यह प्रशंसा और थोड़ी हिचकिचाहट के साथ एक विनम्र निवेदन है।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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पाठ
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