“This night, the first of union, and of the beloved's denial;You committed such folly then, why did your cup not shatter?”
यह प्रिय से मिलन की पहली रात थी, और प्रिय के इनकार की भी। तब तुमने ऐसी मूर्खता की; तुम्हारा जाम क्यों नहीं टूटा?
यह शेर एक ऐसी रात का वर्णन करता है जहाँ भावनाओं का गहरा टकराव है। यह वह रात थी जब पहली बार महबूब से मिलने और करीब आने की उम्मीद थी, एक बहुप्रतीक्षित क्षण। लेकिन, साथ ही, यह महबूब के इंकार या अस्वीकृति की भी रात बन गई। शायर इस विरोधाभास पर विचार करते हुए खुद से सवाल करता है, "तुम्हारा जाम, जो शायद दिल या धैर्य का प्रतीक था, उस वक्त क्यों नहीं टूट गया?" यह दिखाता है कि महबूब के इंकार ने कितनी गहरी पीड़ा दी थी, मानो ऐसी निराशा से दिल को पूरी तरह बिखर जाना चाहिए था।
Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.
ऑडियो
Free — just your email. You'll come right back here.
No comments yet. Be the first.
