“A hope so deep there was, its beautiful cup filled; Offering it thus to the beloved, what complaint is there now?”
एक गहरी आशा थी, उसकी सुंदर प्याली भरी हुई थी। उसे अपने प्रिय को ऐसे अर्पित करने के बाद, अब शिकायत किस बात की है?
यह शेर गहरी, दिली उम्मीदों और आकांक्षाओं की बात करता है, जैसे कोई खूबसूरत प्याला उनसे लबालब भरा हो। शायर कहते हैं कि उन्होंने अपनी ये गहरी आशाएँ अपने महबूब को पूरी तरह समर्पित कर दीं। जब ऐसा पूर्ण और सच्चा समर्पण कर दिया जाता है, तो फिर किसी भी शिकायत या पछतावे के लिए कोई जगह नहीं बचती। यह निःस्वार्थ प्रेम और भक्ति के विचार को खूबसूरती से व्यक्त करता है, जहाँ व्यक्ति बदले में कुछ भी उम्मीद किए बिना सब कुछ दे देता है, और इस प्रकार, देने के कार्य में ही शांति और संतोष पाता है। यह प्रेम में परम त्याग का प्रमाण है।
Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.
ऑडियो
Free — just your email. You'll come right back here.
No comments yet. Be the first.
