વહે તો ખૂન છો વહેતું, નહિ તો છો ઠરી રહેતું! સહેવો દાગ કાંઈ એ, અરે! ફરિયાદ શાની છે?

“Let blood flow if it must, or let it stay congealed!What kind of wound is this to bear? Oh, what is there to complain about?”

— कलाપી
अर्थ

खून बहे तो बहने दो, नहीं तो जमा रहने दो! यह किस तरह का घाव सहना है? अरे, शिकायत किस बात की है?

विस्तार

यह दोहा हमें एक मज़बूत और लचीली भावना रखने के लिए प्रेरित करता है। यह कहता है कि हमें दर्द या मुश्किल परिस्थितियों पर अटके नहीं रहना चाहिए, चाहे वे सक्रिय रूप से हो रही हों या हमारे अतीत का एक स्थायी हिस्सा बन गई हों। यह जीवन की चुनौतियों को, चाहे वे छोटी हों या बड़ी, बिना शिकायत स्वीकार करने का सुझाव देता है। कवि पूछते हैं कि हमें दुख या पछतावे का बोझ क्यों उठाना चाहिए, यह दर्शाता है कि जो है उसके बारे में शिकायत करने का कोई वास्तविक अर्थ नहीं है। यह साहस और शांत सहनशीलता के साथ कठिनाइयों का सामना करने का आह्वान है, प्रतिरोध के बजाय स्वीकृति में शांति खोजना।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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