એવી કદમબોસી કરીને કાં લજાવો રોજરોજ? છે દિલ્લગી પ્યારી મગર ક્યાં હું અને ક્યાં આ રહમ?

“Such foot-kissing, why do you daily bring me shame?Jest is dear, but where am I, and where this grace?”

— कलाપી
अर्थ

आप रोज़-रोज़ ऐसी क़दमबोसी करके मुझे क्यों शर्मिंदा करते हैं? दिल्लगी तो प्यारी है, पर कहाँ मैं और कहाँ यह इतनी बड़ी रहमत।

विस्तार

यह शेर एक प्रेमी की मधुर लज्जा को व्यक्त करता है। शायर अपने महबूब से धीरे से पूछ रहा है, "तुम रोज़-रोज़ मेरे पैरों को चूमकर या इतना गहरा सम्मान देकर मुझे क्यों शर्मिंदा करते हो?" वे आगे कहते हैं, "हालांकि तुम्हारा प्यार और दिल्लगी मुझे बहुत प्यारी है, पर मैं इतनी बड़ी कृपा या सम्मान के लायक खुद को नहीं समझता। कहाँ मैं और कहाँ यह इतनी बड़ी रहमदिली, इसमें बहुत फर्क है।" यह विनम्रता की एक दिली अभिव्यक्ति है, जो यह दर्शाती है कि शायर ऐसे प्यार की इच्छा रखता है जो अधिक बराबरी का हो, बजाय इसके कि इतनी तीव्र प्रशंसा हो जो उन्हें अयोग्य महसूस कराए।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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