दाया कौन पर कीजिये , का पर निर्दय होय। सांई के सब जीव है , कीरी कुंजर दोय॥

“Whose fault is it that you commit this cruelty? For the dear one, all creatures are, like the cow and the elephant.”

— कबीर
अर्थ

हे दाया, तुम किस पर ऐसा क्रूरता कर रही हो? मेरे प्रिय के लिए, सभी जीव गाय और हाथी के समान हैं।

विस्तार

कबीर दास जी इस दोहे में हमसे बहुत सीधा सवाल पूछते हैं कि आखिर हम किस पर दया करें और किस पर निर्दयी बनें? वे समझाते हैं कि चींटी जैसे छोटे से जीव से लेकर विशालकाय हाथी तक, सभी प्राणी तो उसी एक परमेश्वर, साईं के अपने हैं। जब सभी जीव उसी एक मालिक की रचना हैं, तो फिर किसी के प्रति कठोरता दिखाना भला कैसे सही हो सकता है? यह हमें सिखाता है कि हमें हर जीव में ईश्वर का अंश देखना चाहिए और सभी के प्रति समान करुणा रखनी चाहिए।

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