“I have spoken what I had to say, nothing more can be uttered. One remains, the other has departed, the river's waves are at play.”
मैंने जो कहना था, वह कह दिया; अब कुछ और नहीं कहा जा सकता। एक रहा और दूसरा चला गया, जैसे नदी की लहरें समा गई हों।
कबीर दास जी यहाँ कहते हैं कि जो कुछ उन्हें कहना था, वह उन्होंने कह दिया है और अब कुछ और कहने को बचा नहीं है। यह एक गहरी संतुष्टि और पूर्णता का एहसास कराता है, जैसे किसी सत्य को पूरी तरह प्रकट कर दिया गया हो। वे आगे समझाते हैं कि जीवन में चीज़ें आती-जाती रहती हैं – कुछ ठहरती हैं और कुछ विलीन हो जाती हैं, ठीक वैसे ही जैसे नदी की लहरें उठकर उसी में समा जाती हैं। यह संसार के नश्वर स्वरूप और परिवर्तन के निरंतर प्रवाह को सहजता से स्वीकार करने का संदेश है।
Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.
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