हंसा मोती विण्न्या , कुञ्च्न थार भराय। जो जन मार्ग न जाने , सो तिस कहा कराय॥

“The swan adorns with pearls, the gentle stream is full. How can one guide a soul that does not know the path?”

— कबीर
अर्थ

हंसा मोती से सुशोभित है और कुञ्चन में थार (भरपूर) है। जो व्यक्ति मार्ग को नहीं जानता, उसे कौन राह दिखा सकता है।

विस्तार

कबीर दास जी जब कहते हैं कि हंस मोतियों से सजे हैं और नदी प्रेम से भरी है, तो वे हमें इस दुनिया की खूबसूरती और इसमें छिपी हुई गहरी आध्यात्मिक सच्चाई के बारे में बता रहे हैं। वे दर्शाते हैं कि प्रकृति में हर जगह ज्ञान और सत्य बिखरा पड़ा है, ठीक वैसे ही जैसे हंस मोती चुनता है और धारा भरी रहती है। लेकिन कबीर यहाँ एक बहुत गहरी बात कहते हैं – अगर किसी इंसान को अपनी ज़िंदगी का रास्ता ही नहीं पता, तो उसे कोई बाहर से कैसे समझा सकता है? यह दोहा हमें याद दिलाता है कि आत्म-ज्ञान और अपनी पहचान जानने की चाहत ही सही राह दिखाती है।

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