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सुमरण से मन लाइए , जैसे पानी बिन मीनप्राण तजे बिन बिछड़े , सन्त कबीर कह दीन50॥ ~*~*~*~*~*~*~*~*~*~*~*~*~*~*~*~*~*~*

Bring your mind to remembrance, just as a fish without water. Separated from the soul, it is said by Saint Kabir.

कबीर
अर्थ

सुमिरन से मन को लाओ, जैसे पानी के बिना मछली। आत्मा से अलग होने पर, संत कबीर कहते हैं।

विस्तार

कबीर दास जी कहते हैं कि अपने मन को ईश्वर के सुमिरन में ऐसे लगाओ, जैसे मछली पानी के बिना तड़पती है। जिस तरह पानी से बिछड़कर मछली प्राण छोड़ देती है, उसी तरह हमारा मन भी ईश्वर के नाम से दूर रहकर बेचैन हो जाता है। यह हमें सिखाता है कि परमात्मा की याद ही हमारे मन के लिए जीवन का आधार है, इसके बिना मन अधूरा और विचलित रहता है।

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