सोवा साधु जगाइए , करे नाम का जाप। यह तीनों सोते भले , साकित सिंह और साँप॥

“Wake up, saintly person, and chant the name. These three sleepers—the ignorant, the wealthy, and the serpent.”

— कबीर
अर्थ

हे साधु, जागो और नाम का जाप करो। ये तीनों सोए हुए हैं—अज्ञानी, धनी और साँप।

विस्तार

कबीर दास जी इस दोहे में एक साधु को जगाकर प्रभु नाम का जाप करने का आग्रह करते हैं। वे बड़े प्यार से समझाते हैं कि अज्ञानी व्यक्ति, धनवान और साँप – इन तीनों का सोए रहना ही ठीक है, क्योंकि इनके जागने से अक्सर कुछ अच्छा नहीं होता। यहाँ 'नींद' सिर्फ़ शरीर की नहीं, बल्कि आध्यात्मिक बेख़बरी और दुनियावी चीज़ों में खोए रहने की तरफ़ इशारा करती है। यह हमें याद दिलाता है कि अपनी आत्मा को जगाकर ईश्वर को याद करना कितना ज़रूरी है।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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