साईं इतना दीजिये , जा मे कुटुम समाय। मैं भी भूखा न रहूँ , साधु ना भूखा जाय॥

“Sai, grant me enough to sustain my family; let me not starve, nor let the wandering ascetic go hungry.”

— कबीर
अर्थ

हे साईं, मेरे परिवार के लिए इतना प्रदान करें कि न मैं भूखा रहूँ और न ही कोई साधु भूखा जाए।

विस्तार

कबीर का यह दोहा कितनी सादगी से जीवन का गहरा संदेश देता है! इसमें वे भगवान से बहुत ज़्यादा नहीं, बस उतना ही मांगते हैं जिससे उनका परिवार पल जाए और वे स्वयं भी भूखे न रहें। पर सबसे खूबसूरत बात यह है कि वे चाहते हैं कि कोई भी साधु या अतिथि उनके द्वार से भूखा न लौटे। यह सिर्फ पेट भरने की बात नहीं, बल्कि संतोष, साझा करने और अतिथि-सत्कार के भारतीय मूल्यों को दर्शाता है।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

ऑडियो

पाठ
हिंदी अर्थ
अंग्रेज़ी अर्थ
हिंदी विस्तार
अंग्रेज़ी विस्तार
Comments · 0

Free — just your email. You'll come right back here.

No comments yet. Be the first.

साईं इतना दीजिये , जा मे कुटुम समाय। मैं भी भूखा न रहूँ , साधु ना भूखा जाय॥ | Sukhan AI