जहाँ दया तहाँ धर्म है , जहाँ लोभ तहाँ पाप। जहाँ क्रोध तहाँ पाप है , जहाँ क्षमा तहाँ आप॥

“Where there is compassion, there is dharma; where there is greed, there is sin. Where there is anger, there is sin; where there is forgiveness, there is self.”

— कबीर
अर्थ

जहाँ दया होती है, वहाँ धर्म होता है; जहाँ लोभ होता है, वहाँ पाप होता है। जहाँ क्रोध होता है, वहाँ पाप होता है; और जहाँ क्षमा होती है, वहाँ स्वयं का अस्तित्व होता है।

विस्तार

कबीर दास जी हमें जीवन का बहुत सीधा और सच्चा रास्ता दिखा रहे हैं। वे समझाते हैं कि जहाँ हमारे दिल में दया होती है, वहीं असली धर्म का वास होता है, लेकिन लोभ और क्रोध तो बस हमें पाप की ओर धकेलते हैं। सबसे गहरी बात यह है कि जब हम किसी को क्षमा करते हैं, तो वास्तव में हम अपने सच्चे स्वरूप, अपनी आत्मा से जुड़ते हैं। यह सिर्फ अच्छे-बुरे की बात नहीं, बल्कि हमारी अंदरूनी दुनिया का आईना है जो हमारे कर्मों को गढ़ता है।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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