कबिरा यह तन जात है , सके तो ठौर लगा। कै सेवा कर साधु की , कै गोविंद गुन गा॥

“Kabira, this body will perish, if you can find a resting place for it. What service can you render to the saint, or sing the praises of Govinda?”

— कबीर
अर्थ

कबिरा, यह शरीर एक दिन नष्ट हो जाएगा, अगर आप इसके लिए कोई जगह ढूंढ सकें। साधु की सेवा या गोविंद के गुणगान में आप क्या सेवा कर सकते हैं?

विस्तार

कबीर दास जी इस दोहे में हमें जीवन की सच्चाई से रूबरू कराते हैं कि यह नश्वर शरीर एक दिन खत्म हो जाएगा। तो फिर क्या करें? वे कहते हैं कि अगर तुम इस शरीर को किसी सार्थक जगह लगा सको, तो ज़रूर लगाओ। यह 'ठौर लगाना' दरअसल अपनी आत्मा को एक आध्यात्मिक आश्रय देने जैसा है, जो या तो संतों की निःस्वार्थ सेवा करके मिलता है या फिर गोविंद के नाम का गुणगान करके। इन दोनों रास्तों से ही हम इस क्षणभंगुर जीवन को अमरत्व का स्पर्श दे सकते हैं और इसे व्यर्थ होने से बचा सकते हैं।

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