“Sant hi mein sat baantai, roti mein te took. Kahe Kabir ta das ko, kabahun na aave chook. The fault for falling while walking, Kabir says, is not there. If Kabir is sitting here, then the fault is on the head.”
संतों के पास सत्य बाँटा जाता है, और रोटी में भी टूक होती है। कबीर कहते हैं कि दास को कभी चूक नहीं होती। मार्ग में चलते हुए जो गिर जाता है, उस पर दोष नहीं है। यह कबीर बैठा है, तो दोष सिर पर है।
कबीर दास जी यहाँ हमें एक खूबसूरत सीख दे रहे हैं। पहले वो कहते हैं कि जैसे रोटी का एक टुकड़ा बांटा जाता है, वैसे ही संत सत्य को फैलाते हैं, और ऐसा सच्चा भक्त कभी चूक नहीं करता। फिर एक गहरी बात जोड़ते हैं कि अगर रास्ते पर चलते हुए गिर जाओ, तो इसमें कोई दोष नहीं। असल गलती तो तब है जब हम कुछ करें ही नहीं, बस हाथ पर हाथ धरे बैठे रहें, क्योंकि आध्यात्मिक मार्ग पर प्रयत्नशील रहना ही सबसे महत्वपूर्ण है।
Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.
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