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जागन में सोवन करे , साधन में लौ लाय। सूरत डोर लागी रहे , तार टूट नाहिं जाय॥ 57॥

Keep the lamps lit in the vigil, and the means ready to burn; keep the thread of life connected, lest it should break.

कबीर
अर्थ

जागने के समय दीपक जलाए रखना और साधन में निरंतर ऊर्जा बनाए रखना चाहिए। जीवन का यह डोर जुड़ा रहे, ताकि यह कभी टूट न जाए।

विस्तार

इस दोहे में कबीर जी हमें समझा रहे हैं कि अपनी जागृत अवस्था में भी हमें भीतर से हमेशा उस परम सत्ता में लीन रहना चाहिए। जैसे साधना में लौ जलती रहती है, वैसे ही हमारी आत्मा की लौ भी निरंतर प्रज्वलित रहनी चाहिए। यह 'सूरत डोर' यानी हमारी चेतना का धागा, उस परमात्मा से जुड़ा रहे, इसे कभी टूटने न दें। यही सच्ची साधना है जो हमें भीतर से जोड़े रखती है।

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