“One who does not know the Guru, the Lord, or the ultimate truth, how can he ever cross the ocean of existence?”
जो व्यक्ति गुरु और भगवान का ज्ञान नहीं रखता, वह जीवन के सागर को पार नहीं कर सकता।
कबीर दास जी इस दोहे में जीवन के भवसागर को पार करने के लिए सच्चे गुरु की अहमियत समझा रहे हैं। वह कहते हैं कि अगर गुरु खुद सत्य को नहीं जानता और बस आडंबरों की तरफ इशारा करता है, तो ऐसे में शिष्य को स्वयं समझदारी से चुनना होगा। अपनी गहरी खोज और सही मार्गदर्शन के बिना, कोई भी इस विशाल संसार सागर को पार करके मोक्ष तक नहीं पहुँच सकता।
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