आगे अंधा कूप में , दूजे लिया बुलाय। दोनों बूडछे बापुरे , निकसे कौन उपाय॥

“One plunges into the blind well, the other calls out to him. Both are in the deep pit, who can find a way out?”

— कबीर
अर्थ

आगे एक अंधा कुआँ है और दूसरा उसे बुला रहा है। दोनों गहरे गड्ढे में हैं, कौन रास्ता निकाल सकता है।

विस्तार

यह दोहा जीवन की एक गहरी दुविधा को दर्शाता है, जहाँ एक तरफ़ अंधा कुआँ है और दूसरी तरफ़ एक और बुलाहट जो शायद किसी नई उलझन की ओर ले जा रही है। कबीरदास जी पूछते हैं कि जब दोनों ही मुश्किल में फँस गए हों, तो भला इससे बाहर निकलने का रास्ता क्या होगा? यह हमें याद दिलाता है कि जब हम ऐसे दोराहे पर खड़े हों जहाँ दोनों विकल्प कठिन लगें, तब हमें विवेक और धैर्य से काम लेना चाहिए।

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