Sukhan AI
करहु छोड़ कुल लाज , जो सतगुरु उपदेश है। होये सब जिव काज , निश्चय करि परतीत करू॥ 480॥

Abandoning the shame of lineage, heed the true Guru's advice. Let all life's affairs be accomplished; resolve to cross the boundaries of the world.

कबीर
अर्थ

कुल की लाज त्याग दो, जो सच्चे गुरु का उपदेश है। सारे जीवन के कार्य हो जाएं, निश्चित कर संसार से पार उतरूं।

विस्तार

यह दोहा हमें सिखाता है कि हमें अपनी कुल-परंपरा की लाज या गर्व को त्याग देना चाहिए, और सच्चे गुरु के उपदेशों को ही सर्वोपरि मानना चाहिए। जैसे एक नदियाँ अपने उद्गम को छोड़कर सागर में मिल जाती है, वैसे ही हमें भी सांसारिक बंधनों से मुक्त होकर गुरु की बताई राह पर चलना चाहिए। जब हम ऐसा दृढ़ निश्चय और विश्वास के साथ करते हैं, तो जीवन के सभी कार्य अपने आप सफल हो जाते हैं, और हम इस भवसागर को भी पार कर जाते हैं। यह मन की शुद्धता और आत्मा की मुक्ति की ओर बढ़ने का गहरा संदेश है।

ऑडियो

पाठ
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