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जेहि खोजत ब्रह्मा थके , सुर नर मुनि अरु देव। कहै कबीर सुन साधवा , करु सतगुरु की सेव॥ 471॥

He who seeks Brahma, grows weary, sages, men, and gods. Kabir says, O friend, serve the grace of the True Guru's nod.

कबीर
अर्थ

जो व्यक्ति ब्रह्मा आदि को खोजता है, वह थक जाता है। कबीर कहते हैं कि हे साधु, सतगुरु की सेवा करो।

विस्तार

कबीर दास जी यहाँ एक बहुत गहरी बात समझा रहे हैं, जैसे दोस्त को प्यार से समझाते हैं। वे कहते हैं कि जिसे ब्रह्मा, देवता और बड़े-बड़े मुनि तक बाहर की दुनिया में खोजते-खोजते थक जाते हैं, वो सत्य कहीं बाहर नहीं मिलता। यह अंतहीन बाहरी तलाश सिर्फ़ थकान ही देती है। अगर हमें जीवन की सच्ची राह और शांति चाहिए, तो प्यारे साधक, एक सच्चे गुरु की सेवा करो, उनके दिखाए मार्ग पर चलो। क्योंकि असली ज्ञान और मुक्ति तो सतगुरु की संगत और उनकी कृपा में ही है, जो हमें अपने भीतर से जोड़ती है।

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