सतगुरु मिले जु सब मिले , न तो मिला न कोय। माता-पिता सुत बाँधवा ये तो घर घर होय॥

“From the True Guru, all else is found; nothing is found, nor is anything found. Binding mother and father to child, this happens in every home.”

— कबीर
अर्थ

सतगुरु से सब कुछ मिल जाता है, लेकिन न तो कुछ मिलता है और न ही कुछ मिलता है। माता-पिता का संतान से बंधना तो हर घर में होता है।

विस्तार

कबीर साहब हमें एक बहुत गहरी बात समझा रहे हैं कि असली खजाना और जीवन का सार तो सच्चे गुरु के मिलने में ही छिपा है। उनके बिना हम कितना भी कुछ पा लें, लेकिन असल संतोष कभी नहीं मिलता। दुनिया में माता-पिता, बच्चे और बाकी रिश्ते-नाते तो हर घर में देखने को मिलते हैं, ये तो सांसारिक मोहमाया का हिस्सा हैं। लेकिन सच्चा ज्ञान और मुक्ति का मार्ग तो केवल सतगुरु ही दिखाते हैं, जो हमें अज्ञान के अंधेरे से बाहर निकालता है।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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