करै दूरि अज्ञानता , अंजन ज्ञान सुदेय। बलिहारी वे गुरुन की हंस उबारि जुलेय॥ 460॥
“By dispelling ignorance, the lamp of knowledge is gained. I sacrifice myself to the Guru who saves the swan.”
— कबीर
अर्थ
गुरु से अज्ञानता दूर हो जाती है और ज्ञान का दीपक प्राप्त होता है। मैं उन गुरुओं को नमन करता हूँ जो हंस को बचाते हैं।
विस्तार
कबीर दास जी इस दोहे में गुरु के महत्व को बहुत ही खूबसूरती से समझाते हैं। वे कहते हैं कि गुरु हमारी अज्ञानता के अंधेरे को दूर कर ज्ञान का दीपक जलाते हैं, जिससे हमारी आत्मा प्रकाशित हो उठती है। यह 'हंस को बचाना' दरअसल आत्मा को संसार के भ्रम और मोह माया के दलदल से निकालने जैसा है, जिसके लिए कवि अपने गुरु पर खुद को न्यौछावर करते हैं।
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