जो गुरु पूरा होय तो , शीषहि लेय निबाहि। शीष भाव सुत्त जानिये , सुत ते श्रेष्ठ शिष आहि॥ 458॥
“If the teacher is complete, he guides the disciple. Know the true meaning of the head's feeling; the son is the best student.”
— कबीर
अर्थ
यदि गुरु पूर्ण हो तो वह शिष्य का मार्गदर्शन करता है। सिर के भाव का सच्चा अर्थ जानना चाहिए; पुत्र सर्वश्रेष्ठ शिष्य होता है।
विस्तार
कबीर दास जी यहाँ समझाते हैं कि एक सच्चा और पूर्ण गुरु अपने शिष्य को आखिर तक सही राह दिखाता है और उसका मार्गदर्शन करता है। यह गुरु-शिष्य के अटूट बंधन और गुरु के गहरे समर्पण को दर्शाता है। वे आगे कहते हैं कि शिष्य का आंतरिक भाव, उसकी सच्ची लगन ही सबसे महत्वपूर्ण है, और यह आध्यात्मिक संबंध इतना पवित्र है कि शिष्य को पुत्र से भी बढ़कर माना जाता है।
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