तन मन शीष निछावरै , दीजै सरबस प्रान। कहैं कबीर गुरु प्रेम बिन , कितहूँ कुशल नहिं क्षेम॥

“Sacrificing body, mind, and head, give me your entire life. Kabir says that without the love of the Guru, there is no safety or peace.”

— कबीर
अर्थ

शरीर, मन और सिर का बलिदान करते हुए, मुझे अपना संपूर्ण जीवन दीजिए। कबीर कहते हैं कि गुरु के प्रेम के बिना, कहीं भी कोई सुरक्षा या शांति नहीं है।

विस्तार

यह दोहा गुरु के प्रति संपूर्ण समर्पण की बात करता है, जैसे हम किसी प्यारे मित्र से अपने दिल की बात करते हैं। कबीर दास जी कहते हैं कि हमें अपना तन, मन और यहां तक कि अपना शीश भी गुरु को अर्पित कर देना चाहिए, अपना सर्वस्व न्योछावर कर देना चाहिए। उनका मानना है कि गुरु के प्रेम के बिना, हमें कहीं भी सच्चा सुख और शांति नहीं मिल सकती। यह दर्शाता है कि गुरु का साथ और उनका आशीर्वाद ही जीवन में असली कुशल-मंगल लाता है।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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