“A crore of coins, the sun of a crore thousand. But darkness, without a Guru, cannot be dispelled.”
कोटि चन्दा उगही, सूरज कोटि हज़ार। तीमिर तौ नाशै नहीं, बिन गुरु घोर अंधार। इसका अर्थ है कि भले ही लाखों सिक्के और हजारों सूरज मिल जाएं, लेकिन गुरु के बिना घना अंधेरा दूर नहीं हो सकता।
कबीर दास जी इस दोहे में कितनी खूबसूरत बात कहते हैं! वे कहते हैं कि भले ही करोड़ों चाँद और हज़ारों-करोड़ों सूरज एक साथ उग आएं, पर वो भीतर के गहरे अंधकार को दूर नहीं कर सकते। यह अंधकार बाहरी नहीं, बल्कि अज्ञानता का है जो हमें भीतर से घेरे रहता है। इस घने आध्यात्मिक अंधेरे को सिर्फ एक सच्चे गुरु का ज्ञान ही मिटा सकता है, जो हमें सही राह दिखाता है और जीवन में प्रकाश भरता है।
Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.
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