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गुरु मूरति आगे खड़ी , दुनिया भेद कछु नाहिं। उन्हीं कूँ परनाम करि , सकल तिमिर मिटि जाहिं॥ 445॥

Standing before the Guru's form, the world holds no secrets. By merely chanting His name, all darkness vanishes.

कबीर
अर्थ

गुरु की मूर्ति के सामने, दुनिया का कोई रहस्य नहीं है। केवल उन्हीं का नाम जपने मात्र से, सारा अंधकार मिट जाता है।

विस्तार

कबीर कहते हैं कि जब गुरु की मूरत सामने हो, तो दुनिया के सारे भेद, सारे रहस्य खुल जाते हैं, कुछ भी छिपा नहीं रहता। यह 'अंधेरा' असल में हमारी अज्ञानता और भ्रम ही है जो हमें सही राह नहीं दिखाता। बस गुरु को प्रणाम करने से या उनके नाम को जपने से, यह सारा आध्यात्मिक अंधकार दूर हो जाता है और हम सच्चाई की रोशनी देख पाते हैं।

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