गुरु को सिर राखिये , चलिये आज्ञा माहिं। कहैं कबीर ता दास को , तीन लोक भय नहिं॥ 440॥
“Keep the Guru on your head, and follow his command. Kabir says to the devotee, 'There is no fear of the three worlds.'”
— कबीर
अर्थ
गुरु को सिर पर रखो और उनकी आज्ञा का पालन करो। कबीर कहते हैं कि भक्त को तीनों लोकों का कोई भय नहीं होता।
विस्तार
कबीर दास जी इस दोहे में गुरु के प्रति हमारी गहरी श्रद्धा और समर्पण का महत्व समझाते हैं। वे कहते हैं कि अपने गुरु को हमेशा सर्वोच्च सम्मान देना चाहिए, मानो उन्हें सिर पर धारण किया हो, और उनकी हर आज्ञा का पालन करना चाहिए। जो शिष्य इस पथ पर चलते हैं, कबीर कहते हैं कि उन्हें तीनों लोकों में किसी भी चीज़ का भय नहीं रहता, क्योंकि गुरु का मार्गदर्शन ही हमें परम निर्भयता प्रदान करता है।
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