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कुमति कीच चेला भरा , गुरु ज्ञान जल होयजनम-जनम का मोरचा , पल में डारे धोय434

The student, filled with bad intellect, is immersed; the Guru's knowledge is like water. The peacock's dance across countless births is washed away in a moment.

कबीर
अर्थ

कुमति से भरा चेला, गुरु के ज्ञान के जल में डूब रहा है। जो पंख कई जन्मों में फैले थे, वे पल भर में धुल जाते हैं।

विस्तार

कबीरदास जी इस दोहे में बताते हैं कि कैसे एक शिष्य जो कुमति और अज्ञानता के कीचड़ में सना हुआ है, उसे गुरु के ज्ञान रूपी निर्मल जल से ही शुद्धि मिल सकती है। जैसे पानी मैल को धो देता है, वैसे ही गुरु का सच्चा ज्ञान हमारे जन्म-जन्म के accumulated दोषों और अहंकार रूपी जंग (मोरचा) को पल भर में साफ़ कर देता है। यह हमें सिखाता है कि आध्यात्मिक समझ से ही जीवन की सारी उलझनें और भ्रम मिट जाते हैं, और हमारी आत्मा पवित्र हो जाती है।

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