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सब काहू का लीजिये , साचां सबद निहार। पच्छपात ना कीजिये कहै कबीर विचार॥ 431॥

Accept everyone, observe the true word. Do not discriminate, says Kabir's thought.

कबीर
अर्थ

सबके काहू का लीजिये, साचां सबद निहार। पच्छपात न कीजिये, कहै कबीर विचार। इसका अर्थ है कि आपको सभी को स्वीकार करना चाहिए और सच्चे शब्दों पर ध्यान देना चाहिए। कबीर कहते हैं कि किसी के साथ भेदभाव नहीं करना चाहिए।

विस्तार

कबीर दास जी हमें समझाते हैं कि जीवन में हर किसी से कुछ न कुछ सीखने को मिलता है, बस हमें सच्ची बात को पहचानने वाली नज़र चाहिए। वे कहते हैं कि किसी के प्रति कोई पक्षपात मत रखो, क्योंकि सच्चा ज्ञान या 'सबद' तो हर जीव में, हर कोने में छिपा है। यह हमें सिखाता है कि हम बाहरी दिखावे पर नहीं, बल्कि भीतर की सच्चाई पर ध्यान दें और सबको एक समान प्रेम दें, ठीक वैसे ही जैसे सूरज की रोशनी बिना भेद-भाव सबको मिलती है।

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