क्या मुख लै बिनती करौं , लाज आवत है मोहि। तुम देखत ओगुन करौं , कैसे भावों तोहि॥

“What plea should I make from my face, modesty overcomes me. Seeing you, what plea shall I make, oh how should I express my feelings?”

— कबीर
अर्थ

मैं अपना मुख लेकर क्या विनती करूँ, मुझे लाज आ रही है। तुम मुझे देखकर क्या विनती करूँ, मेरे भावों को तुम्हें कैसे समझाऊँ।

विस्तार

कबीर दास जी यहाँ अपने भीतर के भावों को व्यक्त करने में असमर्थता बताते हैं। जब हम उस परमात्मा के सामने होते हैं, तो अपनी सारी कमियाँ हमें साफ दिखती हैं, और इसी वजह से एक गहरी शर्मिंदगी महसूस होती है। यह शर्म ऊपरी नहीं, बल्कि दिल की सच्चाई है कि हमारे अवगुणों के साथ हम उस दिव्य प्रेम को कैसे व्यक्त करें। उनकी भक्ति इतनी सच्ची और गहरी है कि उसे शब्दों में समेटना मुमकिन ही नहीं लगता।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

ऑडियो

पाठ
हिंदी अर्थ
अंग्रेज़ी अर्थ
हिंदी विस्तार
अंग्रेज़ी विस्तार
Comments · 0

Free — just your email. You'll come right back here.

No comments yet. Be the first.

← Prev27 / 10