सुरति करौ मेरे साइयां , हम हैं भोजन माहिं। आपे ही बहि जाहिंगे , जौ नहिं पकरौ बाहिं॥

“Oh my Lord, please show mercy to us, for we are in distress. We will surely perish if you do not save us.”

— कबीर
अर्थ

हे मेरे भगवान, आप पर कृपा करें, क्योंकि हम मुसीबत में हैं। यदि आपने हमें नहीं बचाया, तो हम निश्चित रूप से नष्ट हो जाएंगे।

विस्तार

यह दोहा एक गहरी पुकार है, जहाँ भक्त खुद को जीवन की मुश्किलों के भँवर में फँसा हुआ महसूस करता है। वह अपने प्रभु से करुणा की भीख मांगता है, कहता है कि हम ऐसी स्थिति में हैं जैसे पानी की तेज धारा में बह रहे हों। अगर आप आकर हमारा हाथ नहीं थामेंगे, तो हम निश्चित रूप से डूब जाएंगे या बह जाएंगे। यह इंसान की लाचारी और ईश्वर पर उसकी पूरी निर्भरता को बहुत खूबसूरती से दर्शाता है।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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