गोत्यंद के गुण बहुत हैं , लिखै जु हिरदै मांहि। डरता पाणी जा पीऊं , मति वै धोये जाहि॥

“Gotyanda possesses many virtues, writing them in the heart. But fearing water, he drinks it, and his intellect gets washed away.”

— कबीर
अर्थ

गोत्यंद के गुण हृदय में लिखे हैं, पर पानी से डरकर जब वह पीता है, तो उसकी बुद्धि धुल जाती है।

विस्तार

कबीर यहाँ हमें समझा रहे हैं कि गोत्यंद के भीतर कितने गुण छिपे हैं, जैसे हृदय में ही ज्ञान लिखा हो। पर कमाल है, उसे पानी से डर लगता है और इसी डर में वो उसे पी लेता है, जिससे उसकी सारी समझ धुल जाती है! ये सिर्फ एक कहानी नहीं, बल्कि ये हमें सोचने पर मजबूर करता है कि जीवन में कई बार छोटे-छोटे डर या हमारी अपनी झिझकें भी कैसे हमारी गहरी समझ और अच्छे गुणों को बहा ले जाती हैं।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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