हंसा मोती विण्न्या , कुञ्च्न थार भराय। जो जन मार्ग न जाने , सो तिस कहा कराय॥ — कबीर
“One who does not know the path of life, what can he possibly do? The swan, the pearl, the creeper, and the river are all merely examples.”
अर्थ
हंसा, मोती, विण्ण्या और कुञ्चन थार भराय; जो जन जीवन का मार्ग न जानता, वह क्या कार्य कर सकता है।
विस्तार
कबीर दास जी इस दोहे में हंस, मोती और अन्य सुंदर दृश्यों के माध्यम से जीवन के मार्ग की असीम सुंदरता और व्यापकता को दर्शाते हैं। वे कहते हैं कि यदि किसी व्यक्ति को जीवन का सही मार्ग ही ज्ञात न हो, तो वह भला क्या कर सकता है, उसके सारे प्रयास निरर्थक हो जाते हैं। सच्चा ज्ञान और सफलता तभी मिलती है जब हम अपने भीतर झांककर जीवन के वास्तविक उद्देश्य को पहचान लेते हैं।
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