सुमरण से मन लाइए , जैसे पानी बिन मीन। प्राण तजे बिन बिछड़े , सन्त कबीर कह दीन॥ — कबीर

सुमरण से मन लाइए , जैसे पानी बिन मीन। प्राण तजे बिन बिछड़े , सन्त कबीर कह दीन॥

“Bring your mind to remembrance, like a fish without water. Separated from the soul, it is like life without breath, Kabir has said.”

— कबीर

अर्थ

सुमिरन से मन को लाओ, जैसे पानी के बिना मछली। आत्मा से अलग होना, जीवन के बिना सांस छोड़ने जैसा है, कबीर ने कहा है।

विस्तार

कबीर दास जी इस दोहे में बताते हैं कि हमारे मन को हमेशा ईश्वर के सुमिरन में लगाना कितना ज़रूरी है। वे समझाते हैं कि जिस तरह मछली पानी के बिना तड़पती है, वैसे ही हमारा मन भी प्रभु के नाम के बिना अधूरा और बेचैन रहता है। इस बिछोह को कबीर जी प्राण त्यागने जैसा बताते हैं। यह हमें सिखाता है कि सच्ची शांति और अर्थ केवल ईश्वरीय याद में ही मिलते हैं।

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