तीरथ गये ते एक फल , सन्त मिले फल चार। सत्गुरु मिले अनेक फल , कहें कबीर विचार॥ — कबीर

तीरथ गये ते एक फल , सन्त मिले फल चार। सत्गुरु मिले अनेक फल , कहें कबीर विचार॥

“Going to a pilgrimage yields but one result, Meeting a saint grants four benefits. Meeting a true master grants countless fruits, Thus speaks the thought of Kabir.”

— कबीर

अर्थ

तीर्थ जाने से एक ही फल मिलता है, संतों से चार फल मिलते हैं। सच्चे गुरु से अनगिनत फल मिलते हैं, यह कबीर का विचार है।

विस्तार

कबीर साहिब इस दोहे में हमें समझा रहे हैं कि कैसे बाहरी कर्मकांडों से ज़्यादा ज़रूरी सच्चे गुरु का सान्निध्य है। वे कहते हैं कि तीर्थयात्रा से बस एक फल मिलता है और संतों से मिलने पर चार, पर जब सद्गुरु का साथ मिल जाए, तो ज्ञान और मुक्ति के अनगिनत फल मिलते हैं। यहाँ 'फल' सिर्फ इनाम नहीं, बल्कि आध्यात्मिक समझ और जीवन की गहरी सच्चाई की तरफ इशारा करते हैं, जो हमें सतगुरु ही दे सकते हैं। यह हमें बताता है कि सच्चे मार्गदर्शक की सीख ही जीवन को पूरी तरह से बदल सकती है।

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