जाके जिव्या बन्धन नहीं , ह्र्दय में नहीं साँच। वाके संग न लागिये , खाले वटिया काँच॥ — कबीर

जाके जिव्या बन्धन नहीं , ह्र्दय में नहीं साँच। वाके संग न लागिये , खाले वटिया काँच॥

“Do not attach yourself to one whose life is not bound, whose heart holds no truth. Do not associate with them, for they are like broken glass.”

— कबीर

अर्थ

जिस व्यक्ति का जीवन बंधनों से नहीं है और जिसके हृदय में सत्य नहीं है, उससे कोई लगाव न रखे और न ही उसके साथ कोई संबंध बनाए, क्योंकि वह टूटे हुए काँच के समान है।

विस्तार

कबीर दास जी इस दोहे में हमें बहुत ज़रूरी बात समझा रहे हैं, दोस्त। वो कहते हैं कि ऐसे लोगों से दोस्ती मत करो जिनकी बातों में कोई लगाम नहीं और जिनके दिल में सच्चाई नहीं है। ऐसे लोग टूटे हुए काँच के टुकड़ों जैसे होते हैं जो सिर्फ़ चोट पहुँचाते हैं। यह एक गहरी सीख है कि हमें हमेशा सच्चे और ईमानदार लोगों का साथ चुनना चाहिए ताकि हमारा मन शांत और सुरक्षित रहे।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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