जग में बैरी कोई नहीं , जो मन शीतल होय। यह आपा तो ड़ाल दे , दया करे सब कोय॥ 37॥
“In the world, there is no enemy, for one whose heart is cool and tranquil. Cast away this ego, and everyone will show compassion.”
— कबीर
अर्थ
कवि कहते हैं कि इस संसार में कोई शत्रु नहीं होता, जो मन से शांत और शीतल हो। इस अहंकार को त्याग दो, और सभी लोग दया करेंगे।
विस्तार
कबीर दास जी यहाँ कितनी प्यारी बात कह रहे हैं कि असल में दुनिया में कोई हमारा दुश्मन नहीं होता, बस हमारा मन शांत और ठंडा होना चाहिए। यह जो 'आपा' यानी हमारा अहंकार है, यही सारी मुसीबतों की जड़ है। जैसे ही हम इस घमंड को छोड़ देते हैं, देखिएगा कैसे हर कोई हम पर दया और प्रेम बरसाने लगता है। तो अपने मन को शांत रखें और अहंकार को त्याग दें, फिर सारी दुनिया आपकी अपनी लगेगी!
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