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दस द्वारे का पिंजरा , तामे पंछी का कौन। रहे को अचरज है , गए अचम्भा कौन॥ 33॥

The cage of ten doors, which bird resides within it? What wonder is this, that it departed so suddenly?

कबीर
अर्थ

दस द्वारे का पिंजरा, उसमें कौन सा पंछी रहता है? यह कैसा अचरज है कि वह अचानक चला गया?

विस्तार

कबीर दास जी यहाँ हमारे शरीर को दस दरवाजों वाला पिंजरा बताते हैं, जिसमें हमारी आत्मा रूपी पक्षी रहता है। यह हमें सोचने पर मजबूर करता है कि हमारा शरीर और यह जीवन कितना क्षणभंगुर है। असल में, आत्मा का इस नश्वर शरीर में टिके रहना ही सबसे बड़ा आश्चर्य है, फिर उसके एक दिन अचानक चले जाने में भला क्या हैरानी? यह हमें जीवन की अस्थिरता और आत्मा की स्वतंत्रता की याद दिलाता है।

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पाठ
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