दीठा है तो कस कहूं , कह्मा न को पतियाइ। हरि जैसा है तैसा रहो , तू हरिष-हरिष गुण गाइ॥

“If you have seen, then what can I say? Do not make it a matter of doubt. Be like Hari (Vishnu), and keep singing praises of Hari (Vishnu).”

— कबीर
अर्थ

अगर तुमने देख लिया है, तो मैं क्या कहूँ? इसे संदेह का विषय मत बनाओ। हरि (विष्णु) जैसा रहो, और हरि के गुणों का गुणगान करते रहो।

विस्तार

यहाँ कबीर दास जी हमें सिखाते हैं कि यदि आपने परमात्मा का दर्शन कर लिया है, तो उसे शब्दों में बयान करना व्यर्थ है, क्योंकि आपकी बात पर कोई सहजता से विश्वास नहीं करेगा। वे कहते हैं कि इस दिव्य अनुभव को शब्दों की कसौटी पर परखने या दूसरों को समझाने की बजाय, आपको बस हरि जैसा ही बन जाना चाहिए। इसका अर्थ है कि उस दिव्य स्वरूप को अपने भीतर धारण कर लेना और फिर निरंतर, बड़े प्रेम और आनंद से उनके गुणों का गान करते रहना ही सच्चा मार्ग है, जो आपके अनुभव को पुष्ट करता है और आपको उस परमानंद में लीन रखता है।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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