पहुँचेंगे तब कहैगें , उमड़ैंगे उस ठांई। आजहूं बेरा समंद मैं , बोलि बिगू पैं काई॥ 266॥
“When we reach, we will say, 'We are filled with joy in that place.' Today, in the river, I say, 'What is wrong with Bigu?'”
— कबीर
अर्थ
पहुँचने पर हम कहेंगे कि हम उस जगह पर बहुत खुश होंगे। आज मैं नदी में यह कह रहा हूँ कि बिगु को क्या हुआ है।
विस्तार
कबीर दास जी यहाँ कितनी ख़ूबसूरती से इंसानी फितरत पर रोशनी डाल रहे हैं! हम अक्सर ये सोचते रहते हैं कि जब सब अच्छा हो जाएगा, तब हम खुशी मनाएँगे और दुनिया को बताएँगे, मानो सारी खुशियाँ भविष्य में टिकी हों। लेकिन कबीर पूछते हैं, 'आज जब हम इस जीवन रूपी दरिया में हैं, तो हमें 'बिगु' जैसी छोटी-छोटी परेशानियों या सवालों पर ध्यान क्यों नहीं देना चाहिए?' यह हमें याद दिलाता है कि असली जीवन तो यहीं, अभी है, और हमें अपनी आज की उलझनों को सुलझाने पर ध्यान देना चाहिए, न कि सिर्फ़ दूर की खुशियों का इंतज़ार करना चाहिए।
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