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अंषड़ियां झाईं पड़ी , पंथ निहारि-निहारि। जीभड़ियाँ छाला पड़या , राम पुकारि-पुकारि॥ 257॥

My limbs are covered in wounds, and I gaze upon the path. My tongue is covered in sores, calling out for Rama.

कबीर
अर्थ

मेरे अंग घायल हो गए हैं, और मैं रास्ता देखते-देखते थक गया हूँ। मेरी जीभ पर छाले पड़ गए हैं, और मैं राम का नाम लेते-लेते थक गया हूँ।

विस्तार

कबीर दास जी यहाँ अपने प्रभु के विरह में एक भक्त की गहरी अवस्था का वर्णन कर रहे हैं। वे कहते हैं कि उनकी आँखें रास्ता देखते-देखते पथरा गई हैं और जीभ राम नाम जपते-जपते छालों से भर गई है। यह दिखाता है कि ईश्वर को पाने का मार्ग कितना कठिन और समर्पण भरा हो सकता है, जहाँ शरीर की पीड़ा भी प्रेम के सामने तुच्छ हो जाती है।

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