लंबा मारग , दूरिधर , विकट पंथ , बहुमार। कहौ संतो , क्यूं पाइये , दुर्लभ हरि-दीदार॥

“Oh path long, far, and fraught with peril, how shall we know, O sages, why attaining the sight of Hari is so rare?”

— कबीर
अर्थ

हे संतों, यह मार्ग लंबा, दूर और विकट है, और इस पर बहुत बाधाएँ हैं; आप बताइए कि हम कभी दुर्लभ हरि-दीदार (भगवान के दर्शन) कैसे प्राप्त करेंगे।

विस्तार

कबीरदास जी यहाँ जीवन के आध्यात्मिक सफर को एक बहुत ही लंबा, दूर और मुश्किल रास्ता बता रहे हैं, जिस पर कई खतरे भी हैं। वे संतों से पूछ रहे हैं कि जब ईश्वर हर जगह हैं, तो उनसे मिल पाना या उनका दीदार कर पाना इतना दुर्लभ क्यों है। यह दोहा हमें सोचने पर मजबूर करता है कि कैसे बाहरी दुनिया की मुश्किलें हमें अपने भीतर की शांति और ईश्वर से जुड़ने से रोकती हैं, और सच्चे दर्शन की चाह कितनी गहरी होती है।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

ऑडियो

पाठ
हिंदी अर्थ
अंग्रेज़ी अर्थ
हिंदी विस्तार
अंग्रेज़ी विस्तार
Comments · 0

Free — just your email. You'll come right back here.

No comments yet. Be the first.

← Prev51 / 10