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तू तू करता तू भया , मुझ में रही हूँवारी फेरी बलि गई , जित देखौं तित तू248

Oh, oh, you do it, oh, you; in me, you remain not. To where I turn, I sacrificed, there I see only you.

कबीर
अर्थ

तू ही तू करता है, और मुझमें अब तू नहीं है। जहाँ भी मेरा वरण होता है, वहाँ मुझे केवल तू ही दिखाई देता है।

विस्तार

कबीर दास जी इस दोहे में बताते हैं कि जब हम पूरी लगन से ईश्वर का नाम जपते हुए 'तू तू' करते हैं, तो धीरे-धीरे हमारा अपना 'मैं' यानी अहंकार खत्म हो जाता है और हम उसी ईश्वर में लीन हो जाते हैं। यह ऐसा है जैसे एक बूंद सागर में मिलकर सागर ही बन जाए, और फिर अपना अलग अस्तित्व भूल जाए। इस अवस्था में भक्त को हर तरफ, हर चीज़ में केवल ईश्वर ही नज़र आता है, क्योंकि उसका अपना वजूद ईश्वर के साथ एकाकार हो गया है।

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